संकटों का नाश करती मां संकटा
संकटों का नाश करती मां संकटा
धार्मिक मान्यता है कि माँ संकटा की पूजा न केवल विपत्तियों का नाश करती है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने में भी अचूक मानी जाती है।
वाराणसी के संकटा घाट के पास स्थित माँ संकटा देवी मंदिर एक अत्यंत प्राचीन और सिद्ध पीठ माना जाता है।
देवी संकटा माता का सबसे प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण मंदिर उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) में स्थित है। संकटा घाट के पास स्थित इस मंदिर को ही माता का सबसे मुख्य स्थान माना जाता है।
वाराणसी के इस प्राचीन मंदिर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें:
धार्मिक महत्व:
संकटा माता को "संकटों को हरने वाली" देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान यहाँ रुककर माता की पूजा की थी।
विशेष पूजा:
यहाँ शुक्रवार के दिन दर्शन करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि माता संकटा की पूजा करने से जीवन के सभी दुख और बाधाएं दूर हो जाती हैं।
मूर्ति का स्वरूप:
मंदिर के गर्भगृह में माता की भव्य प्रतिमा है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे स्वयं प्रकट हुई थीं। यहाँ देवी के साथ हनुमान जी और अन्य देवताओं की भी मूर्तियां स्थापित हैं
काशी (वाराणसी) में माँ संकटा का मंदिर अत्यंत प्राचीन और जाग्रत है। मान्यता है कि यहाँ पूजा करने से कुंडली के बड़े से बड़े "ग्रह दोष" भी शांत हो जाते हैं।
माँ संकटा की पूजा से ग्रह शांति
माँ संकटा को नवग्रहों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में देखा जाता है। मान्यता है कि माँ संकटा की पूजा आराधना से ग्रहों का उपचार होता है:
शनि और राहु-केतु दोष:
माँ संकटा को आदि शक्ति का रूप माना जाता है। इनकी उपासना से शनि की साढ़े साती, ढैया और राहु-केतु द्वारा जनित मानसिक और शारीरिक कष्टों में तुरंत राहत मिलती है।
संकट मोचन रूप:
जैसा कि नाम से स्पष्ट है "संकटा", वे हर उस बाधा को हर लेती हैं जो ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति के कारण आती है।
मानसिक शांति:
चंद्रमा के कमजोर होने पर होने वाला तनाव माँ संकटा के दर्शन मात्र से दूर हो जाता है।
संकटाष्टक का पाठ:
ऋषि मार्कण्डेय द्वारा रचित "संकटाष्टक स्तोत्र" का पाठ ग्रह दोषों को दूर करने का सबसे शक्तिशाली साधन है।
शुक्रवार का महत्व:
वैसे तो माँ की पूजा हर दिन फलदायी है, लेकिन शुक्रवार को विशेष पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है।
श्रृंगार और भोग:
माँ को नारियल, चुनरी और हलवे का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
ज्योतिष के अनुसार, जब व्यक्ति पर चौतरफा संकट हो और कोई रास्ता न सूझे, तब माँ संकटा की शरण लेना ही सर्वश्रेष्ठ "उपचार" माना गया है।
शनि : भय, बाधा और कार्यों में विलंब की समाप्ति।
राहु / केतु : भ्रम, आकस्मिक दुर्घटना और मानसिक क्लेश से मुक्ति।
मंगल : कर्ज से मुक्ति और साहस में वृद्धि।
वाराणसी स्थित माँ संकटा मंदिर से संबंधित जानकारी:
श्री श्री माँ संकटा मंदिर संकटा गली, चौक, वाराणसी
सुबह 6:00 से दोपहर 1:00,
फिर शाम 3:00 से रात 9:00 बजे तक
संकटाष्टक स्तोत्र
मां संकटा देवी (माता पार्वती का एक रूप) की स्तुति के लिए संकटाष्टक स्तोत्र अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसका पाठ करने से जीवन के भारी कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं।
भगवान शिव द्वारा रचित यह स्तोत्र "पद्म पुराण" से लिया गया है। यहाँ इसका संस्कृत पाठ और हिंदी अर्थ दिया गया है:
श्री संकटाष्टकम् (Sankatashtakam)
विनियोग:
अस्य श्रीसंकटाष्टकस्तोत्रमंत्रस्य शिव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, संकटाभगवती देवता, मम समस्तसंकटविनाशार्थं जपे विनियोगः।
स्तोत्र पाठ:
नारद उवाच –
प्रणम्य शिरसा देवीं विश्वाधारं महेश्वरीम् ।
कुशलां कोमलाकारं संकटां प्रणमाम्यहम् ॥ १ ॥
(नारद जी कहते हैं—विश्व की आधारभूता, महेश्वरी, कुशल और कोमल स्वरूप वाली संकटा देवी को मैं सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ।)
नमस्तेऽस्तु जगद्धात्रि नमस्ते भक्तवत्सले ।
नमस्ते संकटे देवि पाहि मां संकटाद् भयात् ॥ २ ॥
(हे जगद्धात्री! आपको नमस्कार है। हे भक्तवत्सले! आपको नमस्कार है। हे संकटा देवी! आपको नमस्कार है, मुझे संकटों के भय से बचाएं।)
भजामि त्वां जगत्पूज्ये संकटे भक्तवत्सले ।
प्रसीद मे महाभागे संकटाद् विमुच्यताम् ॥ ३ ॥
(हे जगत्पूज्य संकटा देवी! मैं आपका भजन करता हूँ। हे महाभागे! मुझ पर प्रसन्न हों और मुझे संकटों से मुक्त करें।)
त्वमेव सृष्टिं कुरुषे त्वं पाल्यसि चराचरम् ।
त्वमेव संहारे देवि जगतां संकटे सदा ॥ ४ ॥
(हे संकटा देवी! आप ही सृष्टि की रचना करती हैं, आप ही चराचर जगत का पालन करती हैं और आप ही प्रलयकाल में जगत का संहार करती हैं।)
त्वमेव विष्णुः ब्रह्मा च शिवस्त्वं च सुरेश्वरी ।
त्वमेव आदिशक्तिश्च जगतां संकटे सदा ॥ ५ ॥
(हे देवी! आप ही विष्णु, ब्रह्मा और शिव हैं। आप ही सुरेश्वरी हैं और आप ही जगत की आदिशक्ति हैं।)
नमस्ते संकटे देवि नमस्ते भवतारिणि ।
त्राहि मां संकटे देवि त्रैलोक्यभवतारिणि ॥ ६ ॥
(हे संकटा देवी! आपको नमस्कार है। हे भवतारिणी! आपको नमस्कार है। हे तीनों लोकों को तारने वाली देवी! मेरी संकटों से रक्षा करें।)
य इदं पठते स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं श्रद्धयान्वितः ।
तस्य सर्वाणि कार्याणि सिद्ध्यन्ति संकटाद् भयात् ॥ ७ ॥
(जो व्यक्ति तीनों संध्याओं में श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके सभी कार्य सिद्ध होते हैं और संकटों का भय दूर हो जाता है।)
नारद उवाच –
इत्येतत् कथितं देव्याः स्तोत्रं मया तव ।
पठनात् सर्वसिद्धिः स्यात् संकटाद् विमुच्यते ॥ ८ ॥
(नारद जी कहते हैं—यह देवी का स्तोत्र मैंने आपसे कहा है। इसके पठन से सभी सिद्धियां प्राप्त होती हैं और मनुष्य संकट से मुक्त हो जाता है।)
पाठ करने के लाभ
* संकट नाश: जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह हर प्रकार के मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकटों को दूर करता है।
* मनोकामना पूर्ति: नियमित पाठ से रुके हुए कार्य बनने लगते हैं।
* सुरक्षा: यह शत्रुओं और अज्ञात भय से सुरक्षा प्रदान करता है।
शुक्रवार के दिन माता संकटा के मंदिर में या घर पर माता की मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाकर इसका पाठ करना विशेष फलदायी होता है।