जानवरों के चमड़े के लिए क्रूरता रहित, चमड़े की तरह प्रदर्शित होने वाला फ्लेदर जैव विकल्प विकसित


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आईआईटी कानपुर ने मंदिर के फूलों और खेत के कचरे से बने जानवरों के चमड़े के लिए क्रूरता रहित, चमड़े की तरह प्रदर्शित होने वाला फ्लेदर जैव विकल्प विकसित किया है।  

आईआईटी कानपुर समर्थित PHOOL.co ने चमड़े की तरह प्रदर्शित होने वाला फ्लेदर विकसित किया है। विकसित किये गए “फ्लेदर” के लिए भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री वेंकैया नायडू जी और केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ० हर्ष वर्धन द्वारा BIRAC इनोवेटर अवार्ड 2021 से सम्मानित किया गया। विकसित किया गया फ्लेदर मंदिर के फूलों और खेत के कचरे से बने जानवरों के चमड़े के लिए एक क्रूरता-रहित जैव-विकल्प है जिसे फूल द्वारा एक बायोमेट्रिक विकसित किया गया है जो लगभग चमड़े की तरह प्रदर्शन करता है। 

फ्लेदर को बायोमिमिक्री के सिद्धांतों पर बनाया गया है, फ्लेदर को सौंदर्य अभिव्यक्ति, लचीलापन, घनत्व और शक्ति के लिए अनुकूलित किया जा सकता है। फ्लेदर बनाने की प्रक्रिया अल्ट्रा-टिकाऊ है, न केवल कई पारंपरिक डाउनस्ट्रीम लेदर टैनिंग प्रक्रियाओं में कटौती कर रही है, बल्कि समाज के हाशिए के वर्गों से महिलाओं को बेहतर रोजगार के अवसर प्रदान करने में भी मदद कर रही है।

जैविक विज्ञानं और जैव अभियांत्रिकी विभाग इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अमिताभ बंद्योपाध्याय ने बताया कि वेस्ट फ्लावर से फ्लेदर को बनाने के आईडिया को आईआईटी के सहयोग से जानवरों के चमड़े के लिए एक क्रूरता-रहित जैव-विकल्प तैयार किया गया है।