लक्ष्मण जी को शक्ति लगने पर हनुमानजी संजीवनी बूटी के लिए द्रोणागिरी पर्वत को ले गए थे 

 

लक्ष्मण जी को शक्ति लगने पर हनुमानजी संजीवनी बूटी के लिए द्रोणागिरी पर्वत को ले गए थे 

 

पवन पुत्र हनुमान जी लक्ष्मणजी को शक्ति लगने पर हिमालय में आए और द्रोणागिरी पर्वत से औषधिप्रस्थ (द्रोणागिरी पर्वत) का एक हिस्सा लंका ले गए थे।  

द्रोणागिरी पर्वत - जोशीमठ से 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
 

● उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ से मलारी की तरफ लगभग 50 किलोमीटर आगे बढ़ने पर जुम्मा नाम की एक जगह पड़ती है. यहीं से द्रोणागिरी गांव के लिए पैदल मार्ग शुरू हो जाता है*. यहां धौली गंगा नदी पर बने पुल के दूसरी तरफ सीधे खड़े पहाड़ों की जो श्रृंखला दिखाई पड़ती है, उसे पार करने के बाद ही द्रोणागिरी तक पहुंचा जाता है ।।

 

● *संकरी पहाड़ी पगडंडियों वाला तकरीबन दस किलोमीटर का यह पैदल रास्ता काफी कठिन लेकिन, बेहद रोमांचक है* ।।


 

● रामायणों के अनुसार *लक्ष्मणजी को शक्ति लगने पर हनुमान जी इसी हिमालय में आए एवं यहाँ  जोशीमठ के पास पर इसी औषधिप्रस्थ (द्रोणागिरी पर्वत) का एक हिस्सा लंका  को ले गए* ।।


 

● आज भी इस *पहाड़ का ऊपरी भाग कटा हुआ लगता है जो आंखों से देखने पर स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है* ।।

 

● *द्रोणागिरी (7,066 मीटर)* उत्तर भारतीय *राज्य उत्तराखंड* में चमोली जिला हिमालय की ऊंची चोटियों में से एक है ।।

 

यह अभयारण्य की दीवार के उत्तर-पश्चिम कोने में स्थित है, नंदादेवी के चारों ओर चोटियों का एक गढ़  और नंदादेवी अभयारण्य को घेरे हुए है ।।