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पौराणिक कथाएं- जब टूटा शनिदेव का अंहकार (पिप्पलाद की कथा)

पौराणिक कथाएं-    जब टूटा शनिदेव का अंहकार(पिप्पलाद की कथा) - शनि देव महाराज की जय हो -      त्रेतायुग में एक बार बारिश के अभाव से अकाल पड़ा। तब कौशिक मुनि परिवार के लालन-पालन के लिए अपना गृहस्थान छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए अपनी पत्नी और पुत्रों के साथ चल दिए। फिर भी परिवार का भरण-पोषण कठिन होने पर दु:खी होकर उन्होनें अपने एक पुत्र को बीच राह में ही छोड़ दिया।   वह बालक भूख-प्यास से रोने लगा। तभी उसने कुछ ही दूरी पर एक पीपल का वृक्ष और जल का कुण्ड देखा। उसने भूख शांत करने के लिए पीपल के पत्तों को खाया और कुण्ड का जल पीकर अपनी प्यास बुझाई। वह बालक प्रतिदिन इसी तरह पत्ते और पानी पीकर और तपस्या कर समय गुजारने लगा। तभी एक दिन वहां देवर्षि नारद पहुंचे।   बालक ने उनको नमन किया। नारद मुनि विपरीत दशा में बालक की विनम्रता देखकर खुश हुए। उन्होंने तुरंत बालक का यथोचित संस्कार कर वेदों की शिक्षा दी। उन्होंने उसे ओम नमो भगवते वासुदेवाय की मंत्र दीक्षा भी दी।   वह बालक नित्य भगवान विष्णु के मंत्र का जप कर तप करने लगा। नारद मुनि उस बालक के साथ ही रहे। बालक की तप...

"साला" शब्द की रोचक जानकारी

"साला" शब्द की रोचक जानकारी   हम प्रचलन की बोलचाल में साला शब्द को एक गाली के रूप में देखते हैं, साथ ही "धर्मपत्नी" के भाई / भाइयों को भी साला / सालेसाहब के नाम से इंगित करते हैं। पौराणिक कथाओं में से एक समुद्र मंथन में एक जिक्र मिलता है, मंथन से जो 14 दिव्य रत्न प्राप्त हुए थे वो थे:-   1- कालकूट (हलाहल) 2- ऐरावत 3- कामधेनु 4- उच्चैःश्रवा 5- कौस्तुभमणि 6- कल्पवृक्ष 7- रंभा (अप्सरा) 8- लक्ष्मी 9- शंख (जिसका नाम साला था) 10- वारुणी मदिरा 11- चन्द्रमा 12- शारंग धनुष 13- गंधर्व 14- और अंत में अमृत   "लक्ष्मीजी" मंथन से "स्वर्ण" के रूप में निकली थी। इसके बाद जब "साला शंख" निकला, तो उसे लक्ष्मी जी का भाई कहा गया।  दैत्य और दानवों ने कहा कि अब देखो लक्ष्मी जी का भाई साला (शंख) आया है।    तभी से ये प्रचलन में आया कि नवविवाहिता "बहु" या धर्मपत्नी जिसे हम गृहलक्ष्मी कहते है, उसके भाई को बहुत ही पवित्र नाम "साला" कहकर पुकारा जाता है।    इसलिए मान्यता है कि जब भी धन-प्राप्ति के उपाय करे "शंख" को नजरअंदाज ना करे, लक्ष्...

कोरोना वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू

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कोरोना वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू    वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए दुनिया भर में वैज्ञानिको द्वारा अथक प्रयास किया जा रहा है। सभी लोग कोविड 19 संक्रमण से निपटने के लिए सफल वैक्सीन के आविष्कार का इन्तजार कर रहे है। इसी क्रम में जनपद कानपुर नगर के प्रखर हॉस्पिटल में कॅरोना वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल किया जाएगा, जिसको लेकर अस्पताल में हैल्दी वालेंटियर की स्क्रीनिंग की जा रही है। आईसीएमआर द्वारा नामित प्रखर अस्पताल के डॉ आर एस कुशवाहा  ने बताया कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ कानपुर के प्रखर हॉस्पिटल को कोवेक्सिन COVAXINE नामक वैक्सीन के लिए ह्यूमन ट्रायल के लिए चुना गया है।   डॉ कुशवाहा के अनुसार यह वैक्सीन कोरोना कोविड 19 वायरस के लिए है। उन्होंने बताया कि इस ह्यूमन ट्रायल में हेल्दी वॉलन्टियर की स्क्रीनिंग का कार्य शुरू किया जा चुका है। इसके लिए स्वस्थ 18 से 55 वर्ष उम्र के बीच के वालंटियर्स को ही चुना जाएगा। डॉ कुशवाहा ने बताया कि इस ट्रायल के दौरान जांच में सफल पाये गए वालंटियर्स को वैक्सीन पहले दिन दिया जाएगा...

आईआईटी के सहयोग से WHO गाईड लाइन्स के अनुसार उन्नति ग्रामीण मास्क बनकर बिकने लगे ऑनलाइन

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आईआईटी के सहयोग से WHO गाईड लाइन्स के अनुसार उन्नति ग्रामीण मास्क बनकर बिकने लगे ऑनलाइन   उन्नत भारत अभियान के तहत सामाजिक पहल करते हुये आईआईटी कानपुर द्वारा गाँव की महिलाओं से उन्नत गुणवक्ता वाले मास्क बनवाकर सीधे ग्राहकों से जोड़ दिया गया दिया गया है। गाँव में बनाये जा रहे मास्क रोज कैम्पस में लाये जाते है, जहां इन्हे सैनीटाइज़ और पैकेज करके लोगो तक पहुंचाया जाता है। पिछले तीन माह में हजारों मास्क मार्केट किए जा चुके हैं। उन्नत भारत अभियान के तहत आईआईटी कानपुर और कानपुर परिवर्तन फॉरम द्वारा मास्क बनाने का काम अप्रैल माह में शुरू किया गया था।    आईआईटी की समन्वयक रीता सिंह के अनुसार उन्नति मास्क को आईआईटी कानपुर के देख रेख में तैयार किया गया है और ग्राहकों ने इसको इसलिए पसंद किया है क्योंकि यह क्वालिटी मास्क है, और इस प्रोजेक्ट का सभी लाभ ग्रामीण महिलाओं के लिए ही जा रहा है। यह मास्क बाज़ार के मास्क से भिन्न है- इसमे 4 पली है और अंदर स्टेटीक चार्ज वाली शील्ड है जो कि ESpin द्वारा सप्लाइ किया जाता है और स्टाइल ऐसा है कि नाक व मुंह...

कक्ष कीटाणुशोधन UV सैनिटाइज़िंग प्रणाली उत्पाद शुद्ध (स्मार्ट फोन संचालित हैंडी अल्ट्रावॉयलेट डिस्नेफ़ेक्शन हेल्पर)

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आईआईटी कानपुर ने विकसित कियाकक्ष कीटाणुशोधन UV सैनिटाइज़िंग प्रणाली उत्पाद शुद्ध (स्मार्ट फोन संचालित हैंडी अल्ट्रावॉयलेट डिस्नेफ़ेक्शन हेल्पर)    वैश्विक महामारी कोविड 19 से निपटने के लिए आईआईटी कानपुर की इमेजिनरी लेबोरेटरी में वैज्ञानिकों ने कक्ष कीटाणुशोधन प्रणाली शुद्ध (स्मार्ट फोन  संचालित हैंडी अल्ट्रावॉयलेट डिस्नेफ़ेक्शन हेल्पर) नामक एक UV सैनिटाइज़िंग उत्पाद विकसित किया है।    इमेजिनरी लेबोरेटरी के डॉ अमनदीप के अनुसार विकसित किया गया उत्पाद शुद्ध एक स्मार्ट फोन संचालित हैंडी अल्ट्रावॉयलेट डिस्नेफ़ेक्शन हेल्पर है और यह प्रोडक्ट देश में कोरोना संक्रमण से निपटने में बहुत कारगर सिद्ध होगा।    UV सैनिटाइज़िंग इस उत्पाद को स्मार्टफोन में एंड्राइड एप्लीकेशन को इंस्टॉल कर उत्पाद को ऑन-ऑफ किये जाने के साथ ही इसकी गति और स्थान को दूरस्थ रूप से नियंत्रित कर सकता है। शुद्ध में 15 वाट की छह यूवी लाइट्स हैं, जिसे ब्लू टूथ टेक्नोलॉजी से संचालित और दूर...

पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड द्वारा कोविड-19 के उपचार के लिए बनाई गई कोरोनिल नाम की औषधि में इस्तेमाल पदार्थों का विवरण आयुष मंत्रालय ने तुरंत देने को कहा

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पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड द्वारा कोविड-19 के उपचार के लिए बनाई गई कोरोनिल नाम की औषधि में इस्तेमाल पदार्थों का विवरण आयुष मंत्रालय ने  तुरंत देने को कहा योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद ने कोविड 19 के उपचार के लिए कोरोनिल नाम की औषधि तैयार किया है। उत्तराखंड के हरिद्वार में इस औषधि की शुरुआत करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि कोविड 19 के लिए पतंजलि ने आयुर्वेदिक चिकित्सकीय नियंत्रण, अनुसंधान, साक्ष्य और परीक्षण पर आधारित औषधि तैयार की है। उन्होंने बताया कि इस औषधि की जांच के दौरान पाया गया कि कोविड 19 से संकृमित 69 प्रतिशत रोगी 3 दिन में ही ठीक हो गए, जबकि शत प्रतिशत एक सप्ताह में स्वस्थ हो गए। बाबा रामदेव ने कहा कि पतंजलि आयुर्वेद ने कोविड-19 की यह दवा चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से विनियमित तरीके से अनुसंधान, प्रमाण और परीक्षण के बाद जारी की है। आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड द्वारा कोविड-19 महामारी के उपचार के लिए उपयोगी बताई जा रही नई दवा का नाम और उसे बनाने में इस्तेमाल किए गए पदार्थों आदि से संबंधित विवरण जल्द से जल्द उपलब्ध कराने को कहा है। आयुष मंत्रालय ने यह...

कोविड 19 के सम्बन्ध में शासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों को लेकर धर्माचार्यो के साथ जिला प्रशासन ने की बैठक 

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  कोविड 19 के सम्बन्ध में शासन द्वारा जारी दिशानिर्देशों को लेकर धर्माचार्यो के साथ जिला प्रशासन ने की बैठक  वैश्विक महामारी कोविड 19 को लेकर देश भर में केंद्र और प्रदेश सरकार के साथ जिला प्रशासन द्वारा सतर्कता बरतते हुए जारी किये गए सभी दिशा निर्देशों का अनुपालन कराया जा रहा है।  इसी क्रम में जनपद उन्नाव में जिलाधिकारी रवींद्र कुमार द्वारा सभी प्रशासनिक अधिकारियों और थानाध्यक्षों के साथ विकास भवन सभागार में जनपद के प्रमुख धर्माचार्यो के साथ बैठक कर कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सरकार द्वारा जारी किये गए दिशानिर्देशों को पालन कराये जाने सम्बंधित चर्चा किया। बैठक में उपस्थित श्री परमहंस आश्रम के पीठाधीश स्वामी आनंद जी महाराज ने बताया कि बैठक को सम्बोधित करते हुए जिलाधिकारी ने मंदिरो और आश्रम परिसर में 5 व्यक्तियों से अधिक एकत्रित न होने देने और मास्क सहित सोशल डिस्टैन्सिंग के नियमो का पूर्णतया पालन कराये जाने के निर्देश दिए। वही जिलाधिकारी ने सभी उपस्थित सभी लोगो से संक्रमण काल के दौरान अपने घरो में ही रहकर पूजन अनुष्ठान करने की अपील किया।        

मंदिर में दर्शन के बाद बाहर सीढ़ी पर थोड़ी देर क्यों बैठा जाता है...

मंदिर में दर्शन के बाद बाहर सीढ़ी पर थोड़ी देर क्यों बैठा जाता है...   किसी भी मंदिर में भगवान के दर्शन करने के बाद मंदिर में मंदिर की पैड़ी या ऑटले में कुछ समय बैठने की  प्राचीन परंपरा है। धर्म के विद्वानों के अनुसार यह प्राचीन परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए होती है। वास्तव में मंदिर की पैड़ी पर बैठ कर एक श्लोक बोलकर भगवान् से प्रार्थना करनी चाहिए। इस परंपरा और श्लोक का शायद ही कुछ लोग पालन करते है।  श्लोक इस प्रकार है ~              "अनायासेन मरणम् , बिना देन्येन जीवनम्।             देहान्त तव सानिध्यम् , देहि मे परमेश्वरम्॥"   इस श्लोक का अर्थ है ~     "अनायासेन मरणम्" अर्थात् - बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो और कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर न पड़ें, कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त ना हों चलते फिरते ही हमारे प्राण निकल जाएं।   "बिना देन्येन जीवनम्" अर्थात् - परवशता का जीवन ना हो। कभी किसी के सहारे ना रहना पड़े। जैसे कि लकवा हो जाने पर व्यक्ति दूसरे पर आश्रित हो जाता है वैसे परवश या बेबस ना...

आईआईटी कानपुर में कोविड-19 से निपटने में महत्वपूर्ण N95 और N99 SWASA मास्क का उत्पादन शुरू 

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आईआईटी कानपुर में कोविड-19 से निपटने में महत्वपूर्ण N95 और N99 SWASA मास्क का उत्पादन शुरू  कानपुर स्थित आईआईटी के स्टार्टअप इनोवेशन एंड इन्क्यूबेशन सेंटर द्वारा कोविड-19 संक्रमण से निपटने में महत्वपूर्ण N95 और N99 ग्रेड फेस मास्क का विशेष प्राविधान के तहत उत्पादन शुरू किया है। फेस मास्क स्वास्थ्य कर्मियों के साथ आम जनता के लिए संक्रमण का प्रसार को रोकने में आवश्यक सुरक्षात्मक उपकरण माना गया है। यह किसी भारत के किसी भी शैक्षणिक संस्थान के टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर द्वारा की गई अपनी तरह की पहली पहल है। N95 और N99 SWASA ग्रेड फेस मास्क का उत्पादन आईआईटी के बिजनेस इनक्यूबेटर परिसर में इनक्यूबेटर ई-स्पिन नैनोटेक की स्नातक की उपाधि प्राप्त कंपनी और इनक्यूबेटेड कंपनी इंडीमा फाइबर्स के सहयोग से निर्माण करेगी जिसका उत्पादन लक्ष्य की मात्रा 25,000 मास्क प्रतिदिन है। मास्क बहुत ही सस्ती कीमत पर आम जनता के लिए उपलब्ध होंगे। ये मास्क कंपनी की वेबसाइट के साथ-साथ कई प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे।    आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो अभय करंदीकर के अनुसार कोविड-19 क...

महाभारत के समय आषाढ़ अमावस्या को लगा था सूर्य ग्रहण - पं हेमंत शुक्ल 

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महाभारत के समय आषाढ़ अमावस्या को लगा था सूर्य ग्रहण - पं हेमंत शुक्ल  वैश्विक महामारी कोरोना काल के दौरान वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण रविवार के दिन 21 जून आषाढ़ अमावस्या को लगेगा। हर साल सूर्य को जब उत्तर या दक्षिण ध्रुव से देखा जाता है तो साल का सबसे बड़ा दिन 21 जून होता है। इस दिन सूर्य की किरण ज्यादा देर तक रहती है और 22 दिसम्बर साल का सबसे छोटा दिन होता है, क्योकि इस दिन सूर्य की किरण पृथ्वी पर कम समय के लिए रहती है। यह दिन इस वजह से साल का लंबा दिन भी माना जाएगा देश के कई शहरों में सूर्य ग्रहण वलयाकार छल्ले जैसा नजर आएगा।  उत्तर प्रदेश के गोंडा निवासी और निशातगंज लखनऊ स्थित माँ ज्योत्सना देवी नवदुर्गा मंदिर के महंत पं हेमंत शुक्ला के अनुसार द्वापर में महाभारत के दौरान आषाढ़ अमावस्या को सूर्य ग्रहण लगा था। जिसके चलते सूर्य के दक्षिणायन होने पर भीष्म पितामह को 6 महीने तक सूर्य के उत्तरायण होने तक का इंतजार करना पड़ा था। ऐसा माना जाता है कि सूर्य के दक्षिणायन होने पर आत्मा को नर्क में जाना पड़ता है जबकि सूर्य के उत्तरायण होने पर आत्मा स्वर्ग में जाती है।  पंडित हेमंत शुक्ल ...